।।093।। बोधकथा। 🌺💐🏵 प्रभु पर विश्वास 🏵💐🌺
हरिराम एक मेडिकल स्टोर का मालिक था। सारी दवाइयों की उसे अच्छी जानकारी थी, दस साल का अनुभव होने के क…
हरिराम एक मेडिकल स्टोर का मालिक था। सारी दवाइयों की उसे अच्छी जानकारी थी, दस साल का अनुभव होने के क…
सुन्दर स्त्री बाद में शूर्पणखा निकली। सोने का हिरन बाद में मारीच निकला। भिक्षा माँगने वाला साधू बाद…
शर्मा जी सुबह सुबह अपने कार्यालय के लिए निकलने वाले थे । तभी अचानक क्षितिज ने एक पैकेट उनके सामने क…
*एक बेटे के अनेक मित्र थे जिसका उसे बहुत घमंड था। पिता का एक ही मित्र था लेकिन था सच्चा ।* *एक दिन …
"अबे देख------ चिड़ियाघर में, अपने तीन साल के बच्चे के साथ घूम रही एक गांव की खूबसूरत नवयुवती क…
*एक बार कागज का एक टुकड़ा हवा के वेग से उड़ा और पर्वत के शिखर पर जा पहुँचा...पर्वत ने उसका आत्मीय स्व…
एक राजा था।वह बहुत न्याय प्रिय तथा प्रजा वत्सल एवं धार्मिक स्वभाव का था। वह नित्य अपने इष्ट देव की …