।।042।। बोधकथा 🌺💐🏵 व्हाट्सएप फ्रेंड 🏵💐🌺


*कार से उतरकर भागतें हुए हॉस्पिटल में पहुँचें*

*नौजवान बिजनेस मैन ने पूछा..*


*“डॉक्टर,* 


*अब कैसी हैं माँ?“*


 *हाँफते हुए उसने पूछा*


*“अब ठीक हैं* 


*माइनर सा स्ट्रोक था।*


 *ये बुजुर्ग लोग उन्हें सही समय पर लें आये, वरना कुछ बुरा भी हो सकता था ...।* “ 🤔🤔


*डॉं ने पीछे बेंच पर बैठे दो बुजुर्गों की तरफ इशारा कर के जवाब दिया ....।*


*“रिसेप्शन से फॉर्म इत्यादि की फार्मैलिटी करनी है अब आपको*


*डॉ ने जारी रखा।*


*“थैंक यू डॉ. साहेब, वो सब काम मेरी सेक्रेटरी कर रही हैं“*


*अब वो रिलैक्स था।*


*फिर*


*वो उन बुजुर्गों की तरफ मुड़ा*


*थैंक्स अंकल, पर*


*मैनें आप दोनों को नहीं पहचाना*


*“सही कह रहे हो बेटा,*


*तुम नहीं पहचानोगें*


*क्योंकि* 


*हम तुम्हारी माँ के वाट्सअप फ्रेंड हैं ।”*


*एक ने बोला*


*“क्या, वाट्सअप फ्रेंड ?*


*चिंता छोड़,*


*उसे अब अचानक से अपनी माँ पर गुस्सा आया।*


*“58 + नॉम का  वाट्सप ग्रुप है हमारा...”*

*सिक्सटी प्लस* 

*नाम के इस ग्रुप में साठ साल व इससे ज्यादा उम्र के लोग जुड़े हुए हैं*


 *इससे जुड़े हर मेम्बर को उसमे रोज एक मेसेज भेज कर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी अनिवार्य होती है!*


*साथ ही*

*अपने आस पास के बुजुर्गों को इसमें जोड़ने की भी ज़िम्मेदारी दी जाती है।”* 


*“महीने में एक दिन हम सब किसी पार्क में मिलने का भी प्रोग्राम बनाते हैं।”*


*“जिस किसी दिन कोई भी मेम्बर मैसेज नहीं भेजता है तो उसी दिन उससे लिंक लोगों द्वारा, उसके घर पर, उसके हाल चाल का पता लगाया जाता है।”*


*आज सुबह तुम्हारी माँ का मैसेज न आने पर हम 2 लोग उनके घर पहुंच गए..।*


*वह गम्भीरता से सुन रहा था*


*“पर माँ ने तो कभी नहीं बताया।उसने धीरे से कहा।*

*माँ से अंतिम बार तुमने कब बात की थी बेटा?* 


*क्या तुम्हें याद है?*

*एक ने पूछा।*


*बिज़नेस में उलझा,*


*तीस मिनट की दूरी पर बने माँ के घर जाने का समय निकालना कितना मुश्किल बना लिया था खुद उसने*


*हाँ पिछली दीपावली को ही तो मिला था वह उनसे गिफ्ट देने के नाम पर।*


*बुजुर्ग बोले*


*“बेटा, तुम सबकी दी हुई सुख सुविधाओं के बीच, अब कोई और माँ या बाप अकेले घर मे कंकाल न बन जाएं...*


*बस*

*यही सोच ये ग्रुप बनाया है हमने।*


*वरना*

*दीवारों से बात करने की तो हम सब की आदत पड़ चुकी है।”*


*उसके सर पर हाथ फेर कर दोनों बुज़ुर्ग अस्पताल से बाहर की ओर निकल पड़े।*


*नवयुवक एकटक उनको जाते हुए देखता ही रह गया।*


🌈 *कुछ सालों के बाद हमें भी एक ऐसा ग्रुप बनाना पड़ सकता है।*


।। मनेन्दु पहारिया।।2

0/09/2022

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